*🌻सोच का फर्क*
एक गरीब आदमी बड़ी मेहनत से एक - एक रूपया जोड़ कर मकान बनवाता है . उस मकान को बनवाने के लिए वह पिछले 20 वर्षों से एक - एक पैसा बचत करता है ताकि उसका परिवार छोटे से झोपड़े से निकलकर पक्के मकान में सुखी सुखी रह सके .
आखिरकार एक दिन मकान बन कर तैयार हो जाता है . तत्पश्चात पंडित से पूछ कर गृह प्रवेश के लिए शुभ तिथि निश्चित की जाती है .
लेकिन गृहप्रवेश के 2 दिन पहले ही भूकंप आता है और उसका मकान पूरी तरह ध्वस्त हो जाता है .
यह खबर जब उस आदमी को पता चलती है तो वह दौड़ा दौड़ा बाजार जाता है और मिठाई खरीद कर ले आता है . मिठाई लेकर वह घटनास्थल पर पहुंचता है जहां पर काफी लोग इकट्ठे होकर उसके के मकान गिरने पर अफसोस जाहिर कर रहे थे .
ओह बेचारे के साथ बहुत बुरा हुआ , कितनी मुश्किल से एक - एक पैसा जोड़कर मकान बनवाया था .
इसी प्रकार लोग आपस में तरह तरह की बातें कर रहे थे .
वह आदमी वहां पहुंचता है और झोले से मिठाई निकाल कर सबको बांटने लगता है . यह देखकर सभी लोग हैरान हो जाते हैं .
तभी उसका एक मित्र उससे कहता है , कहीं तुम पागल तो नहीं हो गए हो , घर गिर गया , तुम्हारी जीवन भर की कमाई बर्बाद हो गई और तुम खुश होकर मिठाई बांट रहे हो .
वह आदमी मुस्कुराते हुए कहता है , तुम इस घटना का सिर्फ नकारात्मक पक्ष ही देख रहे हो इसलिए इसका सकारात्मक पक्ष तुम्हें दिखाई नहीं दे रहा है . ये तो बहुत अच्छा हुआ कि मकान आज ही गिर गया ... वरना तुम्ही सोचो अगर यह मकान 2 दिनों के बाद गिरता तो मैं , मेरी पत्नी और बच्चे सभी मारे जा सकत थे . तब कितना बड़ा नुकसान होता .
सत्संग प्रेमियों इस कहानी से आपको समझ में आ गया होगा सकारात्मक और नकारात्मक सोच में क्या अंतर है .
यदि वह व्यक्ति नकारात्मक दृष्टिकोण से सोचता तो शायद वह अवसाद का शिकार हो जाता . लेकिन केवल एक सोच के फर्क ने उसके दु:ख को परिवर्तित कर दिया .
*ईश्वर जो भी करता है,अच्छा ही करता है।*
*हे मानव तू परिवर्तन से काहे को डरता है।।*
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